भारतीय महिला टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष (Richa Ghosh) पिछले 12 महीनों में धीरे-धीरे अभ्यस्त हो गई हैं और फ़िनिशर की भूमिका में सहज हो गई हैं।
घोष जिन्होंने अपने पावर-हिटिंग के साथ अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में प्रवेश करते ही विपक्ष के होश उड़ा दिए, लेकिन उनकी असंगतता ने उनके अवसरों को चोट पहुँचाई। हालांकि जब वह नियमित रूप से टीम में खेलने लगीं तो लगातार रन बनने लगे और नतीजा सबके सामने है।
ऋचा घोष (Richa Ghosh) अपने करियर का सारा श्रेय भारतीय पुरुष क्रिकेट के दिग्गज एम एस धोनी (MS Dhoni) को देती है, इसके अलावा उनके पिता भी उनके मार्गदर्शक रहे है।
दूसरा टी20 में Richa Ghosh ने दिलाई जीत
ज्ञात हो कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरा टी20 एक ऐसा संकटपूर्ण खेल और स्थिति थी जहां ऋचा ने खुद को केंद्र में पाया और भारत को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। स्मृति मंधाना अभी 79 रन बनाकर आउट हो गई थीं, लेकिन विमेन इन ब्लू को जीत के लिए अभी भी 21 गेंदों में 40 रन चाहिए थे।
पहली गेंद घोष खेलती है, और एनाबेल सदरलैंड के खिलाफ छक्का लगाती है। फिर वह हिट करती रहती है और 13 गेंदों पर 26 रन बनाकर नाबाद रहती है। अगर वह ऐसा नहीं कर पाती तो उसने सुपर ओवर की पहली ही गेंद पर हीथर ग्राहम की पहली गेंद पर छक्का जड़ दिया और भारत को फिर से गति मिल गई।
पावर-हिटिंग पर फोकस: Richa Ghosh
ऋचा घोष (Richa Ghosh) ने बताया कि उन्होंने हमेशा फिनिशिंग स्किल और पावर-हिटिंग पर फोकस किया है। ऋचा ने बताया कि पिता के साथ बहुत कुछ सीखा है, और धोनी भी हमेशा खेल में सुधार के लिए मौजूद रहे है।
ऋचा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए कहा, मेरे पिता (मानबेंद्र घोष) ने भी मेरे पावर हिटिंग स्किल को सुधारने में बहुत मदद की, वह हर जगह मेरे साथ जाते थे। वह एक सफल क्रिकेटर नहीं बन सकें, इसलिए वह मेरे सपनों का पीछा करने के लिए मेरा पूरा समर्थन कर रहा है।
मैंने तो छोटे से ही एमएस धोनी जो फिनिशिंग रोल प्ले करते हैं, उन्हें ही मुख्य रूप से फॉलो किया है और बाकी मेरे पापा का टच है।
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